Monday, December 27, 2010



वो अमराईयां वो सरसों के खेत ,


वो नदिया किनारे चांदी सी रेत,


वो भौरों का गुंजन वो कोयल का गाना ,


वो द्वारे पे आ के गौ का रम्भाना ,


वो गाँव का पनघट और पीपल की छाँव


बहुत याद आता है अपना वो गाँव। ।

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