Tuesday, November 16, 2010


गया वसंत गयी हरियाली छोड़ गया उपवन को माली
खली वृक्ष खड़े हैं यहाँ अब अपने हाथ पसारे...
फिर मचल उठे दो धारे...
इन्द्र धनुष की छवि से सुंदर , आँखे जैसे नील समुंदर
मन मंदिर में बसी मूर्ति को , अर्पित गीत हमारे ....
फिर मचल उठे दो धारे..

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